अंबेडकरनगर : फर्जी शैक्षिक व जाति प्रमाणपत्रों के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग में तैनाती के मामले में 11 बर्खास्त शिक्षकों समेत डायट के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। प्राथमिकी में डायट के किसी कर्मचारी का जिक्र न कर समूचे संस्थान को आरोपित किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दल सिंगार यादव की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई किए जाने की पुष्टि की है। विशेष आरक्षण के तहत गत वर्ष जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में 71 शिक्षकों की भर्ती की गई थी। इसमें से 28 शिक्षकों की सूची यहां आलापुर स्थित डायट की ओर से बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई गई थी। डायट ने उक्त शिक्षकों के शैक्षिक समेत जाति प्रमाण पत्रों का भी सत्यापन कराए जाने के बाद अभिलेखों की सत्यता पर मुहर लगाई थी। शिक्षकों के अंकपत्रों के फर्जी होने की शिकायत मिलने के बाद बीएसए ने शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन कराना शुरू किया।
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Wednesday, November 12, 2014
Monday, November 3, 2014
अगले साल आएगी नई शिक्षा नीति : प्रधानाध्यापक, शिक्षकों और छात्रों को भी नई नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने की तैयारी
देश की नई शिक्षा नीति अगले साल तक अस्तित्व में आने की संभावना है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने रविवार को कहा कि नई नीति के लिए सरकार अगले साल से राष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू कराएगी। हमारे पास एक स्पष्ट नीति होनी चाहिए। इसके लिए राज्यवार और क्षेत्रवार चर्चा होगी। इसमें 7 महीने से लेकर 3 साल का समय लग सकता है, जिसे राजनीतिज्ञ, नौकरशाह और विशेषज्ञ मिलकर तैयार करेंगे।
स्मृति के मुताबिक प्रधानाध्यापक, शिक्षकों और छात्रों को भी नई नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। देश क्रमिक विकास के दौर से गुजर रहा है। अब तक देश का भविष्य राजनीति करने वालों में निहित रहा है, लेकिन अब भारत को बदलने का एक बेहतर मौका है। सीबीएसई की वार्षिक सहोदया कार्यक्रम में देश-विदेश से आए प्रधानाध्यापकों और अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य आपके हाथों में है। मैं केवल मानव संसाधन विकास मंत्री नहीं बल्कि स्कूल जाने वाले दो बच्चों की मां भी हूं।
स्मृति के मुताबिक प्रधानाध्यापक, शिक्षकों और छात्रों को भी नई नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल किए जाने की आवश्यकता है। देश क्रमिक विकास के दौर से गुजर रहा है। अब तक देश का भविष्य राजनीति करने वालों में निहित रहा है, लेकिन अब भारत को बदलने का एक बेहतर मौका है। सीबीएसई की वार्षिक सहोदया कार्यक्रम में देश-विदेश से आए प्रधानाध्यापकों और अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का भविष्य आपके हाथों में है। मैं केवल मानव संसाधन विकास मंत्री नहीं बल्कि स्कूल जाने वाले दो बच्चों की मां भी हूं।
Friday, October 31, 2014
छह शिक्षाधिकारियों के तबादले
लखनऊ : शासन ने गुरुवार को छह शिक्षाधिकारियों के तबादले कर दिए। माध्यमिक शिक्षा परिषद, इलाहाबाद के उप शिक्षा सचिव विनोद सिंह को वरिष्ठ प्रवक्ता डायट, कुशीनगर के पद पर नई तैनाती दी गई है। राजकीय महिला इंटर कॉलेज, बांदा की प्राचार्य निशा त्रिपाठी को बांदा डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता व राजकीय महिला इंटर कॉलेज ललितपुर के प्राचार्य कीर्ति शुक्ला को डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता के पद पर नई तैनाती दी गई है। सोनभद्र डायट में वरिष्ठ प्रवक्ता पद पर तैनात विकायल को क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी में उप सचिव बनाया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय इलाहाबाद के उप सचिव पारस नाथ को वरिष्ठ प्रवक्ता डायट मीरजापुर के पद पर नई तैनाती दी गई है। मनोज वर्मा को वरिष्ठ प्रवक्ता डायट औरैया से इसी पद पर डायट बरेली भेजा गया है।
Thursday, October 30, 2014
फीस वापस न करने पर निजी स्कूलों को फटकार
- छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की आड़ में फीस बढ़ाने का मामला
- न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह का वेतन न देने पर सरकार के प्रति भी नाराजगी जताई
- 242 निजी स्कूलों को ब्याज सहित बढ़ी फीस वापसी का हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों की आड़ में बच्चों से अधिक फीस वसूलने वाले राजधानी के निजी स्कूलों को आदेश के बावजूद फीस वापस न करने पर फटकार लगाई है। अदालत ने कहा यह काफी गंभीर मामला है। अदालत ने न्यायमूर्ति अनिल देव कमेटी के वेतन संबंधी बिलों को भी पास न करने पर नाराजगी जताई है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष पेश याची के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद 242 स्कूलों में से एक भी स्कूल ने फीस वापस नहीं की। उन्होंने कहा कि अब फीस वापसी करने वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 373 हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा निदेशालय फीस वापस दिलवाने में असमर्थ है ऐसे में यदि स्कूलों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाए तो अदालत के निर्देश पर ही फीस वापस दिलवाई जा सकती है। उधर गठित कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनिल देव सिंह ने रिपोर्ट पेश कर अदालत को बताया कि स्कूलों ने 6वें वेतन आयोग की सिफारिशों की आड़ में अधिक फीस वसूली है लेकिन आयोग की सिफारिशों को लागू नहीं किया। इसके अलावा काफी स्कूल है जिनके खाते ठीक नहीं है या उन्होंने पेश नहीं किए। अदालत ने स्कूलों के रवैये पर उन्हें फटकार लगाते हुए शिक्षा निदेशालय को रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर तय की है।
सहायक समीक्षाधिकारी के 657 पदों की भर्ती पर रोक
इलाहाबाद : हाईकोर्ट में सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) के 657 पद की भर्ती प्रक्रिया फिलहाल रोक दी गई है। यह रोक सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान लगाई है। साथ ही हाईकोर्ट इलाहाबाद से चार सप्ताह में जवाब भी तलब किया है। इसकी अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायिक पीठ ने वर्ष 2009 में सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) के 468 पदों का विज्ञापन निकाला था। इस भर्ती प्रक्रिया में 80 नंबर की मुख्य परीक्षा हुई और 20 नंबर की कंप्यूटर टाइपिंग परीक्षा हुई। कंप्यूटर टाइपिंग की परीक्षा हाईकोर्ट के ही सिस्टम सेल ने कराई थी। आरोप है कि इसमें व्यापक अनियमितता हुई। दरअसल हर अभ्यर्थी को दस मिनट में 500 शब्द टाइप करने थे और एक से लेकर चाहे जितनी गलतियां हो पर कंप्यूटर दो ही नंबर काटता था। इस पर अभ्यर्थियों ने प्रकरण को कोर्ट में चुनौती दी। आशीष सिंह ने 27 अगस्त 2012 को न्यायाधीश अरुण टंडन की कोर्ट में याचिका दायर की। इसमें न्यायाधीश टंडन ने एक महीने में नए नियम बनाकर कापियों का पुनमरूल्यांकन करने एवं आरक्षण का भी पालन करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने इसका अनुपालन करने के बजाए 2012 में ही स्पेशल कोर्ट में न्यायाधीश सुनील अंबवानी एवं सूर्य प्रकाश केसरवानी की कोर्ट में अपील की तो दोनों न्यायाधीशों ने अरुण टंडन के आदेश को खारिज कर दिया। इस पर आशीष सिंह ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट में नवंबर 2013 में एसएलपी दायर की। इसी बीच हाईकोर्ट ने फिर 2014 में एआरओ 189 पदों का विज्ञापन निकाला तो रिट में उसे भी शामिल किया गया। न्यायाधीश टीएस ठाकुर, आदर्श कुमार गोयल एवं आर भानुमती ने हाईकोर्ट इलाहाबाद के स्पेशल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक याचिका का निपटारा नहीं हो जाता तब तक एआरओ पद पर भर्ती की प्रक्रिया ठप रहेगी। जजों ने हाईकोर्ट से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
Monday, October 27, 2014
एक भी महिला को नहीं बनाया बीएसए -सरकार कर रही भेदभाव, सुल्तानपुर के नागरिक की जनहित याचिका से खलबली
सरकार कर रही भेदभाव, सुल्तानपुर के नागरिक की जनहित याचिका से खलबली
इलाहाबाद : महिला आरक्षण का मुखर विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी पर महिला विरोधी होने का नया आरोप लगा है। एक शख्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके प्रदेश सरकार को घेरा है। उसका दावा है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में महिला शिक्षक होते हुए भी वहां महिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की तैनाती नहीं हो रही है। सरकार लिंगभेद कर रही है। इस याचिका से शिक्षा निदेशालय में खलबली मची है। सुल्तानपुर के कूड़ेभार निवासी सुरेंद्र प्रसाद शुक्ल ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका संख्या 9043/2014 में कहा है कि प्रदेश सरकार महिलाओं को बीएसए बनाने में आनाकानी कर रही है। प्रदेश भर के बीएसए की सूची दाखिल करके कहा है कि पीसीएस एवं पीपीएस बनने वाली महिलाएं एसडीएम एवं पुलिस क्षेत्रधिकारी तो बन जाती है, लेकिन बेसिक शिक्षा अधिकारी नहीं बनाया जाता है, जबकि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में शिक्षक महिलाएं हैं। सुरेंद्र का कहना है कि सरकार प्रमोशन देने के बजाए महिलाओं को राजकीय इंटर कालेज एवं जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान एवं अन्य कार्यालयों में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। अनदेखी से महिलाएं जिला विद्यालय निरीक्षक, सहायक निदेशक, अपर निदेशक, उप निदेशक, संयुक्त निदेशक आदि पदों तक नहीं पहुंच पा रही है। इस याचिका पर कोर्ट ने जवाब मांगा तो विभाग में हड़कंप है। शिक्षा निदेशालय में तो यह याचिका चर्चा का विषय बनी है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक बेसिक दिनेश बाबू शर्मा ने संयुक्त सचिव उत्तर प्रदेश शिक्षा अनुभाग-एक को लिखा है कि बीएसए पद पर तैनाती शासन स्तर पर होती है। ऐसे में विभाग की कहीं कोई गलती नहीं है।
शोध और एमटेक के छात्र देंगे पढ़ाने की भी ट्रेनिंग - डिग्री कॉलेजों में संविदा पर रखे जाएंगे विद्यार्थी
लखनऊ : सूबे के डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पूरा करने के लिए यूजीसी ने एक नई पहल शुरू की है। अब डिग्री कॉलेजों में पीएचडी और पीजी तथा इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिसर्च स्कॉलर और एमटेक विद्यार्थियों को पढ़ाने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। ट्रेनिंग के बाद इन विद्यार्थियों को कॉलेजों में संविदा पर तैनाती भी की जाएगी। दरअसल प्रदेश भर के डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षकों की जबर्दस्त कमी है। प्रदेश के अनुदानित और सरकारी डिग्री कॉलेजों में विभिन्न विभागों में शिक्षकों के करीब पांच हजार पद रिक्त हैं। लखनऊ में ही विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में करीब 215 पद रिक्त हैं। शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए ही यूजीसी ने विद्यार्थियों को ट्रेनिंग दिलाने की पहल की है। लुआक्टा के पूर्व अध्यक्ष मौलींदु मिश्र का कहना है कि यूजीसी का यह निर्णय विद्यार्थियों के लिए काफी अच्छा है। इससे छात्रों को कॅरियर बनाने में काफी मदद मिलगी। वहीं उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय ने शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए इस पर काम करना शुरू कर दिया है। बीटेक के छात्रों को पढ़ाने के लिए शोध विद्यार्थियों और एमटेक के छात्रों के लिए अब विशेष ट्रेनिंग सत्र चलाए जाएंगे जिसमें यह बताया जाएगा कि पढ़ाना कैसे है। यूपीटीयू प्रशासन का कहना है कि इससे कई फायदे होंगे। शोध और एमटेक छात्रों को इस टेनिंग से अपनी पढ़ाई में फायदा होगा। उन्हें पढ़ाने के दौरान अनुभव मिलेगा जिससे भविष्य में मिलने वाली नौकरियों में मदद मिलेगी। वहीं कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सकेगा।
Wednesday, October 22, 2014
सरकार की सुस्ती से लटकी हैं पांच लाख भर्तियां ; आयोग बहाल कर चेयरमैन बनाना भूल गई सरकार
- इन आयोगों को भी मुखिया का इंतजार
1. राज्य विधि आयोग : प्रदेश सरकार ने जनवरी में राज्य विधि आयोग के गठन का फैसला किया था। इसमें एक अध्यक्ष, एक पूर्णकालिक व एक अंशकालिक सदस्य तथा एक सचिव की नियुक्ति की जानी है। आयोग का काम न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निस्तारण में विलंब के कारणों की पड़ताल, उसके समाधान, जनता को तेजी से न्याय दिलाने, न्यायिक प्रक्रिया में सुधार तथा प्रदेश की आवश्यकताओं के लिहाज से मौजूदा कानूनों में संशोधन तथा उन्हें और प्रभावी बनाने पर सरकार को राय देना है। सरकार इस आयोग में भी अध्यक्ष व सदस्यों का चयन नहीं कर पाई है।
2. बाल अधिकार संरक्षण आयोग : प्रदेश सरकार ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया था। इसमें एक अध्यक्ष और छह सदस्यों की नियुक्ति की जानी है लेकिन अभी तक ये नियुक्तियां नहीं की जा सकी हैं। फिलहाल, आयोग का कामकाज शुरू करने के लिए तत्काल प्रभाव से प्रमुख सचिव महिला कल्याण को आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
3. राज्य सूचना आयोग : राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद पिछले तीन महीने से खाली है। सरकार अब तक दो बार सीआईसी चयन के लिए बैठक बुला चुकी है। मगर, दोनों ही बार बैठकें स्थगित कर दी गईं।
महेंद्र तिवारी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने अध्यादेश के जरिये अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का फैसला तो कर लिया लेकिन आयोग में चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति पर चुप्पी साध ली। नतीजा ये है कि समूह ‘ग’ की करीब पांच लाख नौकरियों के लिए भर्तियां शुरू नहीं हो पा रही हैं।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पिछली बसपा सरकार के समय से ही भंग चल रहा था। सपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद इसकी बहाली की कोशिशें शुरू की। इसके लिए दो बार अध्यादेश लाया गया। इसमें एक चेयरमैन व आठ सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है। गौर करने वाली बात है कि अध्यादेश तभी लाए जाते हैं जब इसकी तत्काल आवश्यकता हो और विधानमंडल सत्र आहूत न हो पा रहा हो। सरकार ने आयोग की तात्कालिक आवश्यकता स्पष्ट करते हुए कहा था कि अधिकतर विभागों में समूह ग के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इन पर तेजी से भर्ती की जरूरत है। रिक्त पदों की संख्या के मद्देनजर लोक सेवा आयोग तमाम प्रयासों के बावजूद आवश्यक संख्या में भर्ती नहीं कर पा रहा है। पर, सरकार अब तक चेयरमैन व सदस्यों का चयन नहीं कर सकी है। इस वजह से भर्तियां शुरू नहीं हो पा रही हैं।
Wednesday, October 15, 2014
भर्तियों में लापरवाही से सीएम खफा
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कार्मिक विभाग से तलब की रिपोर्ट
लखनऊ : खाली पदों को भरने में विभागों की लापरवाही से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खफा हैं। उन्होंने कार्मिक विभाग से जानकारी मांगी है कि अब तक किस महकमे ने कितने पदों को भरने की कार्यवाही की और कितने पद खाली हैं। मुख्यमंत्री की प्रमुख सचिव अनीता सिंह ने दो सप्ताह में इसका विस्तृत ब्यौरा तलब किया है।1सत्ता में आने के बाद सीएम ने विभागों को आदेश दिया था कि वे समय सारिणी बनाकर भर्तियां शुरू करें। निर्देश पर प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक राजीव कुमार ने कहा था कि विभाग चरणबद्ध तरीके से नई भर्ती करने के लिए अपने प्रस्ताव भेजें। विभाग यह भी देख लें कि पूर्ण क्षमता के साथ काम करने के लिए कितने पदों की जरूरत है। वर्तमान में स्थिति यह है कि दो साल में ग्राम विकास अधिकारी के 3328 पद रिक्त हुए, जबकि पशु विभाग में वेटनरी अफसर के 148 व पशुधन अधिकारी के 198 पद रिक्त हैं। वेटनरी फार्मासिस्ट, पशुधन प्रसार अधिकारी, ट्रैक्टर चालक, प्रयोगशाला सहायक और चौकीदारों भरने की प्रक्रिया हिचकोलें खा रही है। ऐसी ही स्थिति वन विभाग में 1400 से अधिक तृतीय श्रेणी की भर्तियों को लेकर है। समाज कल्याण विभाग में सहायक विकास अधिकारी, कनिष्ठ लिपिक, आशुलिपिक और ग्राम विकास अधिकारियों की भर्ती की जानी है। लोक निर्माण विभाग में अवर अभियंता, सहायक अभियंता, मानचित्रकार और मेट के सैकड़ों पद खाली हैं। सिंचाई, कृषि, राजस्व, पंचायतीराज, शिक्षा और गृह विभाग की भी ऐसी ही स्थिति है।
लाख कर्मचारियों को मिली दीपावली पर बोनस की सौगात
वित्त विभाग ने जारी किया शासनादेश
आधी रकम नगद मिलेगी और आधी भविष्य निधि खाते में जाएगी
डीए के लिए अभी और इंतजार-राज्य कर्मचारियों को 107 प्रतिशत की दर से बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता (डीए) पाने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। सरकार अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों को बढ़ा हुआ डीए देने का आदेश जारी कर चुकी है। कर्मचारियों को बढ़ा हुआ डीए का भुगतान करने के लिए शासन स्तर पर अभी गुणा-भाग जारी है। बढ़ी दर से डीए का भुगतान करने पर तकरीबन 1400 करोड़ रुपये का खर्च होने का अनुमान है।
लखनऊ : सरकार ने दीपावली के मौके पर 15 लाख अराजपत्रित राज्य कर्मचारियों, शिक्षकों और शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को बोनस की सौगात दी है। सरकार ने कर्मचारियों को 2013-14 के लिए 30 दिनों के वेतन के बराबर बोनस देने का फैसला किया है। बोनस के तौर पर 3454 रुपये मिलेंगे। 50 प्रतिशत नकद भुगतान किया जाएगा जबकि शेष 50 फीसद कर्मचारी के भविष्य निधि खाते में जमा की जाएगी। इस बारे में वित्त विभाग ने बुधवार को शासनादेश जारी कर दिया है। 1शासनादेश के मुताबिक बोनस का लाभ सभी पूर्णकालिक अराजपत्रित कर्मचारियों, राजकीय विभागों के कार्य प्रभारित कर्मचारियों, सहायताप्राप्त शिक्षण व प्राविधिक शिक्षण संस्थाओं, स्थानीय निकायों और जिला पंचायतों के ऐसे कर्मचारियों को मिलेगा जिनके पद का अधिकतम ग्रेड वेतन 4800 रुपये है। यह सुविधा केवल उन कर्मचारियों को मिलेगी जिन्होंने 31 मार्च 2014 तक एक साल की निरंतर सेवा पूरी कर ली हो। जिन कर्मचारियों को 2013-14 में किसी विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही या आपराधिक मुकदमे में दंड दिया गया हो, उन्हें बोनस नहीं मिलेगा। ऐसे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी जिन्होंने बीती 31 मार्च तक तीन वर्ष या उससे अधिक समय तक लगातार काम किया हो और हर साल कम से कम 240 दिन कार्यरत रहे हों, उन्हें भी यह सुविधा मिलेगी। ऐसे पूर्णकालिक कर्मचारी जिन्होंने बीती 31 मार्च तक एक साल निरंतर सेवा पूरी नहीं की है, लेकिन उस तारीख तक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के तौर पर तीन साल या उससे अधिक समय तक लगातार काम करते रहे हों, उन्हें भी यह सुविधा मिलेगी। ऐसे कर्मचारियों को बोनस के तौर पर 1184 रुपये मिलेंगे। बोनस के भुगतान पर 506 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
Tuesday, October 14, 2014
एक सप्ताह से ज्यादा नहीं रोक पाएंगे पत्रावलियां
लखनऊ । शासन के वित्त विभाग में कोई भी अनुभाग अधिकारी अब पत्रावलियों को एक सप्ताह से ज्यादा नहीं रोक सकेगा। इसके पहले पत्रावली को अपने स्तर से निस्तारित करना होगा।
प्रमुख सचिव वित्त राहुल भटनागर हर बुधवार को लंबित पत्रावलियों की भी समीक्षा करेंगे। प्रमुख सचिव वित्त ने यह व्यवस्था इसी महीने से लागू कर दी है।
शासन के कई विभागों, अनुभागों में जब तक संबंधित व्यक्ति नहीं पहुंचता, अफसर टिप्पणियों से प्रकरण को उलझाते रहते हैं।
विशेष सचिव वित्त डॉ. सुरेंद्र कुमार ने विभाग के सभी विशेष सचिवों, संयुक्त सचिवों व उप सचिवों को इस संबंध में एक पत्र लिखा है। इसमें हर सप्ताह सोमवार की शाम तक इस बात की रिपोर्ट देने को कहा गया है कि उनके अधीनस्थ अनुभाग में कितनी पत्रावलियां एक सप्ताह से अधिक समय से लंबित हैं।
Monday, October 13, 2014
आज प्रदर्शन करेंगी महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी
लखनऊ: अपनी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए प्रदेश की हजारों महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी और विद्युत कर्मी मंगलवार यानी 14 अक्टूबर को विधानसभा पर प्रदर्शन करेंगे। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय मंत्री गिरीश पांडेय ने यह बातें कहीं।1इस दौरान अधिकारियों का पुतला फूंका जाएगा। गिरीश पांडेय ने बताया कि तीन साल पहले सपा मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बिजली कर्मियों की समस्याओं को जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया था किंतु अब तक वह पूरे नहीं हो सके हैं। कई बार विद्युत कर्मी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कई बार विधानसभा घेरा व अनशन किया किंतु अब तक 17 सूत्रीय मांगों का निस्तारण नहीं हो सका है जिसका आक्रोश वे मंगलवार को निकालेंगे।जासं, लखनऊ: अपनी लंबित मांगों को पूरा करने के लिए प्रदेश की हजारों महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी और विद्युत कर्मी मंगलवार यानी 14 अक्टूबर को विधानसभा पर प्रदर्शन करेंगे। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में हिंद मजदूर सभा के राष्ट्रीय मंत्री गिरीश पांडेय ने यह बातें कहीं।1इस दौरान अधिकारियों का पुतला फूंका जाएगा। गिरीश पांडेय ने बताया कि तीन साल पहले सपा मंत्री राजेंद्र चौधरी ने बिजली कर्मियों की समस्याओं को जल्द सुलझाने का आश्वासन दिया था किंतु अब तक वह पूरे नहीं हो सके हैं। कई बार विद्युत कर्मी व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कई बार विधानसभा घेरा व अनशन किया किंतु अब तक 17 सूत्रीय मांगों का निस्तारण नहीं हो सका है जिसका आक्रोश वे मंगलवार को निकालेंगे।
खंड शिक्षा अधिकारी बनने के लिए अब हो जाएं तैयार -
- लोक सेवा आयोग की ओर से तकरीबन 400 पदों के लिए विज्ञापन की तैयारी
इलाहाबाद। प्रतियोगियों के लिए नया साल ढेरों उम्मीदें लेकर आ रहा है। कई भर्तियों के बीच अब बेसिक शिक्षा में खंड शिक्षाधिकारी (एसडीआई) समेत कई पदों पर भर्ती की बारी है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग तकरीबन चार सौ पदों के लिए विज्ञापन इस महीने निकालने की तैयारी में है।
आयोग की ओर से दिसंबर तक पीसीएस-2014, आरओ-एआरओ-2013 और लोअर सबऑर्डिनेट-2013 मुख्य परीक्षाएं हैं। इसके बाद राजस्व निरीक्षक के अलावा विभिन्न विभागों में सहायक सांख्यिकी अधिकारी समेत कई अन्य पदों के लिए भी आवेदन मांगा गया है। इन भर्तियों के लिए भी दिसंबर के आखिरी सप्ताह या जनवरी में परीक्षाएं संभावित हैं। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग में भर्ती की तैयारी है। एसडीआई के लिए बीएड न्यूनतम योग्यता रही लेकिन प्रतियोगी इसके विरोध में है। प्रतियोगियों का कहना है कि एसडीआई के लिए भी न्यूनतम योग्यता परास्नातक की जाए। आयोग सूत्र के अनुसार अफसर प्रतियोगियों की इस मांग पर भी विचार कर रहे हैं। इसके अलावा इन दिनों चार भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगा गया है। इससे आयोग की वेबसाइट हैंग कर जा रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि इनकी आखिरी तारीख बीतने के बाद बेसिक शिक्षा की भर्तियों के लिए प्रक्रिया शुरू की जाएगी। खास यह कि इन सभी भर्तियों की प्रक्रिया आगामी वर्ष के पहले छमाही तक पूरी होने की उम्मीद है।
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