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Wednesday, November 12, 2014

14 से 19 नवंबर तक ‘बाल स्वच्छ अभियान’ चलाया जाएगा

केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में बाल स्वच्छता अभियान

बच्चों को बताएंगे स्वच्छता का महत्व

इलाहाबाद : स्वच्छ भारत की मुहिम सार्थक करने के उद्देश्य से केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में 14 से 19 नवंबर तक ‘बाल स्वच्छ अभियान’ चलाया जाएगा। इसके तहत बच्चों को स्वच्छता से जुड़ी हर जानकारी देने के साथ अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रधानाचार्य एस. कृष्ण ने मंगलवार को बैठक करके तैयारी को अंतिम रूप दिया। बताया कि 14 नवंबर को फैंसी ड्रेस, भाषण, गीत, नृत्य प्रतियोगिता के साथ कक्षा की स्वच्छता व विद्यालय परिसर सफाई प्रतियोगिता होगी। इसके बाद 15 नवंबर को स्वच्छ भोजन के तहत ठीक से हाथ धुलने की सीख दी जाएगी। जबकि 17 नवंबर को विद्यार्थियों की स्वयं की स्वच्छता, 18 नवंबर को स्वच्छ पेयजल विषयक कार्यक्रम होगा, 19 नवंबर को स्वच्छ शौचालय का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

Monday, November 3, 2014

किताबों की सुधरेगी क्वालिटी : बदलेगा मानक और जल्द मिलेंगी किताबें

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी और उच्च प्राइमरी स्कूलों की किताबों की क्वालिटी में और सुधार लाने की तैयारी है। कागज की मोटाई 60 ग्राम स्क्वॉयर मीटर (जीएसएम) से बढ़ाकर 70 करने और चमक भी बढ़ाने की तैयारी है। बेसिक शिक्षा निदेशालय के प्रस्ताव पर शासन स्तर पर सहमति बन गई है और जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी ले ली जाएगी।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन आने वाले प्राइमरी और उच्च प्राइमरी तथा संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में कक्षा 8 तक पढ़ने वाले करीब पौने तीन करोड़ बच्चों को मुफ्त किताब देने की योजना है। परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मौजूदा समय जो किताबें दी जा रही हैं उसकी क्वालिटी काफी अच्छी नहीं है। इसके चलते किताबें जल्द फट जाती हैं। इसलिए बेसिक शिक्षा परिषद चाहती है कि बच्चों को ऐसी किताबें दी जाएं जो जल्द न फटने पाएं। इसीलिए कागज की मोटाई बढ़ाने, सुपर क्वालिटी इंक का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। इससे छपाई लागत आठ से 10 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।

कक्षा 8 तक बच्चों को फेल करने पर पाबंदी हटेगी : भुक्खल कमेटी की सिफारिश पर होगा विचार

  • हट सकता है आठवीं तक फेल न करने का नियम
    केंद्र सरकार कर रही है शिक्षा का अधिकार कानून में बदलाव पर विचार
    कई राज्य सरकारों ने केंद्र से की शिकायत
    फेल करने पर रोक होने से बच्चों में घट रही है पढ़ने की क्षमता
नई दिल्ली। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून को लागू हुए करीब चार साल होने वाले हैं। इतने समय बाद कानून का एक नकारात्मक पहलू यह सामने आया है कि बच्चों में पढ़ने की प्रवृत्ति घट रही है। इसके लिए कानून के उस प्रावधान को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसमें आठवीं कक्षा तक बच्चों को फेल करने की मनाही है। राज्यों की आपत्तियों के बाद केंद्र सरकार इस मामले में गीता भुक्खल समिति की सिफारिशों को आधार बनाकर इस कानून में बदलाव की तैयारी कर रही है।

दरअसल, आरटीई लागू होने के तीन साल बाद असर 2013 की रिपोट के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले थे। रिपोट में कहा गया है कि बच्चों में पढ़ने की क्षमता में सुधार नहीं हो रहा है। कक्षा-3 में पढ़ने वाले 60 फीसदी बच्चे ही पहली कक्षा की किताब नहीं पढ़ पाते हैं। इसमें सरकारी स्कूलों की स्थिति और भी चिंताजनक है।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोड की बैठकों में कई बार यह मुद्दा राज्यों की तरफ से उठाया गया है। राज्यों का कहना है कि बच्चों को फेल नहीं करने के प्रावधान का गलत संदेश गया है।

राजस्थान ने तो यहां तक ऐलान कर दिया है कि वह अपने राज्य में इन नियमों में बदलाव करेगा। माना जा रहा है कि कानून के प्रावधान से यह संदेश बच्चों ही नहीं, अभिभावकों में भी गया है। बच्चे जहां पढ़ने को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वहीं, अभिभावक भी ज्यादा ध्यान इसलिए नहीं देते, क्योंकि वे जानते हैं कि 8वीं तक तो बच्चे फेल होंगे नहीं। 
 पढ़ने की क्षमता : देश में प्राथमिक स्कूलों के कक्षा तीन में पढ़ने वाले 40.2 फीसदी बच्चे ही पहली कक्षा की किताब पढ़ पाते हैं। यदि सरकारी स्कूलों के आंकड़े अलग करके देखें, तो यह प्रतिशत और भी कम 32 फीसदी है।’

गणित का ज्ञान : राष्ट्रीय स्तर पर सिफ 25.6 फीसदी छात्र ऐसे हैं, जो तीन अंकों को एक अंक से भाग कर प्रश्न का उत्तर निकाल सकते हैं। सरकारी स्कूलों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। ’

उपस्थिति घटी :राज्यों ने यह बात भी उठाई थी कि स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति घट रही है। असर रिपोट के अनुसार प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति दर 2012 में 73.1 फीसदी थी जो 2013 में घटकर 71.8 फीसदी रह गई।

Wednesday, October 29, 2014

एक दिन में बहाल हुए सवा दो सौ शिक्षक - आन्‍दोलन हुआ कामयाब

एक दिन में बहाल हुए सवा दो सौ शिक्षक

सुल्तानपुर : आखिरकार तीन माह से बहाल की बाट जोह रहे सवा दो सौ बेसिक शिक्षकों के घर दीवाली की खुशी लौट आयी है। देर से ही सही बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों में गैरहाजिर मिलने पर निलंबित किए गए सभी शिक्षकों को बहाल कर दिया है। मंगलवार की शाम इस आशय का आदेश जारी कर दिया गया। हालांकि अभी आरोप पत्र का उत्तर न मिलने की वजह से बारह शिक्षकों की बहाली लटकी हुई है। विदित हो कि जुलाई के आखिरी हफ्ते से ही बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेश यादव ने बेसिक स्कूलों का औचक निरीक्षण शुरू किया। जिसमें गैरहाजिर मिलने वाले करीब सवा दो सौ शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया था। तब अधिकारी ने कहा था कि सभी निलंबित शिक्षकों को सामूहिक रूप से बहाल कर दिया जाएगा लेकिन बहाल हुए सिर्फ 52 शिक्षक। अन्य साथियों की बहाली को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ (लल्लन) गुट ने पहले अनुरोध किया, जब अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी तो काली पट्टी बांध विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दीपावली मनाने के बजाय बीएसए दफ्तर में शिक्षकों ने काला दिवस मनाया। इस लड़ाई में चौबीस घंटे पहले जबर गुट भी कूद पड़ा। बेसिक शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। आखिरकार आंदोलन रंग लाया। बीएसए यादव ने सभी शिक्षकों की बहाली का फैसला करते हुए कहा है कि आरोप पत्र का उत्तर मिलते ही शेष बारह शिक्षकों की भी बहाली कर दी जाएगी।
जताया हर्ष : सुल्तानपुर : प्राथमिक शिक्षक संघ लल्लन व जबर गुट ने शिक्षकों की बहाली के फैसले को देर से आया सही निर्णय कहा है। शिक्षक नेताओं दिलीप, निजाम अहमद, गंगा दूबे, रणवीर, श्रीचंद्र मौर्य आदि ने बहाल हुए शिक्षकों से तन्मयता के साथ शिक्षण कार्य में जुटने का आह्वान किया है!

बदलेगा परिषदीय विद्यालयों का समय - नौ बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच तय करने का फैसला

  • निदेशक बेसिक शिक्षा ने शासन के पास भेजा प्रस्ताव
इलाहाबाद (ब्यूरो)। प्रदेश में अप्रैल से माध्यमिक एवं बेसिक स्कूलों का सत्र लागू करने की तैयारी में लगे शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों का समय बदलने का फैसला किया है। इस बारे में सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की पहल के बाद अब निदेशक बेसिक शिक्षा दिनेश बाबू शर्मा ने परिषदीय विद्यालयों को खोलने और बंद करने का समय प्रात: नौ बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच तय करने का फैसला किया है।
विद्यालयों को खोलने एवं बंद करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशक बेसिक शिक्षा ने शासन की सहमति के लिए भेजा है। इस प्रस्ताव पर सहमति मिलने के बाद परिषदीय विद्यालयों को प्रात: नौ बजे से अपराह्न तीन बजे के बीच खोला जाएगा।

Monday, October 27, 2014

परिषदीय स्कूलों में खराब पढ़ाई पर शासन सख्त - निरीक्षण न होने पर जताई नाराजगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मोहनलालगंज के प्राथमिक स्कूल में निरीक्षण के दौरान मिली खामी के बाद शासन सख्त हो गया है। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने सोमवार को एक आदेश में साफ कहा कि परिषदीय स्कूलों में किसी भी तरह की खामी मिलने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी व ब्लॉक एजूकेशन आफिसर (बीओई) सीधे जवाबदेह होंगे।
मुख्यमंत्री 20 अक्तूबर को प्राथमिक विद्यालय भसंडा मोहनलालगंज लखनऊ में निरीक्षण करने गए थे। उन्होंने इस दौरान मिड-डे-मील के अलावा पढ़ाई की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त की थी। सचिव ने कहा है कि बेसिक शिक्षा मंत्री बैठक में यह हमेशा निर्देश देते हैं कि अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और शिक्षकों को पढ़ाने में रुचि लेने के लिए प्रेरित करेंगे। इसके बावजूद बीएसए व बीईओ निरीक्षण और स्कूली शिक्षा की सुधार में रुचि नहीं ले रहे हैं।
सचिव ने अब साफ निर्देश दिया है कि बीएसए व बीईओ स्कूलों का नियमित निरीक्षण करेंगे। इस दौरान मिड-डे-मील, मुफ्त यूनिफार्म वितरण, पाठ्य-पुस्तक की गुणवत्ता के साथ शैक्षिक स्तर को विशेष रूप से देखेंगे। साथ ही विद्यार्थियों में किताबी जानकारी के साथ सामान्य ज्ञान का स्तर संतोषजनक होना सुनिश्चित कराएंगे। इसके बाद उच्चाधिकारियों को अगर निरीक्षण में खामियां मिली तो बीएसए व बीईओ के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण न होने पर जताई नाराजगी
लखनऊ। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने स्कूलों का निरीक्षण नियमित न होने और शासन को जांच आख्या उपलब्ध न कराए जाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है कि शासनादेश है कि मंडलीय और निदेशालय स्तर के अधिकारियों का टास्क फोर्स बनाते हुए स्कूलों का निरीक्षण कराया जाएगा और इसकी रिपोर्ट शासन को दी जाएगी। इसके बावजूद अधिकारी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं।

सीएम के निरीक्षण ने दिलाई शैक्षिक गुणवत्ता की याद - कमी मिली तो नपेंगे खंड व बेसिक शिक्षा अधिकारी

कमी मिली तो नपेंगे खंड व बेसिक शिक्षा अधिकारी

लखनऊ : बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शासन की ओर से समय-समय पर भले ही लंबे-चौड़े आदेश-निर्देश जारी किये जाते रहे हों, लेकिन नतीजा सिफर है। न तो जमीनी स्तर पर शासन के निर्देशों का पालन हो रहा है और न अधिकारी शासन की मंशा के अनुरूप काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के मोहनलालगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भसंडा के निरीक्षण के बाद बेसिक शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। विभाग की ओर से सोमवार को जारी शासनादेश में चेताया गया कि उच्चाधिकारियों द्वारा स्कूलों के निरीक्षण में यदि कमियां पायी जाती हैं तो संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी व बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निरीक्षण में परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता की कलई खुलने पर शासन स्तर पर जब समीक्षा हुई तो पता चला कि स्कूलों के निरीक्षण के लिए तकरीबन दो महीने पहले आदेश जारी होने के बावजूद अब तक शासन को अफसरों द्वारा किए गए निरीक्षणांे की जानकारी नहीं दी गई है। यह तब है जब परिषदीय स्कूलों में चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की निगरानी और समीक्षा के लिए शासन बीते 11 अगस्त को राज्यस्तरीय टास्क फोर्स भी गठित कर चुका है। लिहाजा शासन ने परिषदीय स्कूलों के शैक्षिक स्तर में सुधार और उनमें चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा और निगरानी के लिए सोमवार को दो शासनादेश जारी किए हैं। इनके जरिए विद्यालयों में शैक्षणिक स्तर सुधारने और स्कूलों में संचालित कार्यक्रमों की निगरानी व समीक्षा पर जोर दिया गया है। शासनादेश में कहा गया है कि टास्क फोर्स के अधिकारी स्कूलों का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि शिक्षक रोज अपनी कक्षा के हर बच्चे से गिनती-पहाड़ा सुनें और वर्णमाला व पुस्तक के मुताबिक बच्चों को लिखना-पढ़ना, समझना सिखाएं। दूसरे शासनादेश में कहा गया है कि स्कूलों के निरीक्षण में खंड व बेसिक शिक्षा अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। लिहाजा निदेशक की ओर से खंड व बेसिक शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश जारी किए जाएं। इसमें वह विभिन्न चीजों की गुणवत्ता के साथ विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर का भी मूल्यांकन करेंगे।

अब स्कूलों पर भी होगा रोड सेफ्टी का जिम्मा

लखनऊ। रोड सेफ्टी के तहत सड़क दुर्घटनाएं रोकने के लिए स्कूलों को भी जिम्मेदारी दी जा रही है। अब स्कूल-कॉलेज प्रशासन 100 मीटर के दायरे में यातायात प्रबंधन देखेगा। परिवहन आयुक्त के रवींद्र नायक ने सभी स्कूल-कॉलेजों को यातायात प्रबंधन की जिम्मेदारी के निर्देश जारी कर दिए हैं। वहीं इसकी निगरानी संभागीय परिवहन अधिकारियों तथा यात्रीकर अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
सुरक्षित यातायात को ध्यान में रखते हुए राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों तरफ 100 मीटर की दूरी पर अब शराब की दुकानें नहीं चलेंगी। जबकि पहले से चल रही शराब की दुकानों को भी हटाया जाएगा। वहीं आसपास लगे शराब के विज्ञापनों को भी हटाया जाएगा। इसके पालन की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को सौंपी गई है। परिवहन आयुक्त ने बताया कि यूपी में पिछले एक साल में शराब पीकर वाहन चलाने के दौरान करीब 800 लोगों ने जान गवां दी। इसका कारण हाईवे किनारे की शराब की दुकानें हैं। जहां शराब पीने के बाद ड्राइवर वाहन चलाते हैं।
परिवहन आयुक्त ने कहा कि स्कूल परिसर के बाहर वाहन की पार्किंग कराने वाले स्कूलों को यातायात व्यवस्था की निगरानी स्वयं करनी होगी। इसके लिए प्रदेश के सभी डीएम व एसएसपी को सर्कुलर जारी कर प्रत्येक स्कूल में एक शिक्षक को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए हैं। नामित नोडल अधिकारी स्कूलों के आस-पास सड़क दुर्घटनाएं रोकने में मदद करेंगे। परिवहन आयुक्त ने कहा कि स्कूलों को भी अपने यहां बच्चों को सड़क पर सुरक्षित चलने की शिक्षा देनी चाहिए। अक्सर स्कूली छात्र-छात्राएं भी उल्टे-सीधे तरीके से वाहन चलाकर दुर्घटनाएं कर देते हैं। नोडल शिक्षक स्कूलों में छात्र-छात्राओं को समझाने के अलावा आस-पास के क्षेत्र में भी एक्सीडेंट फ्री यातायात संचालन में मदद करेंगे। इस काम में नोडल शिक्षक की मदद पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी करेंगे।
एनजीओ के साथ बैठक आज
परिवहन आयुक्त के रविन्द्र नायक सोमवार को रोड सेफ्टी के तहत काम करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। परिवहन आयुक्त यह देखेंगे कि किस प्रकार सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है और लोगों को किस प्रकार जागरूक किया जा सकता है। साथ ही बैठक में इस काम के लिए एनजीओ किस प्रकार मदद कर सकते हैं इसकी संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा।
 प्रत्येक स्कूल में एक शिक्षक बनेगा नोडल अधिकारी
 परिवहन आयुक्त ने सभी डीएम व एसएसपी को भेजा सर्कुलर
 राजमार्गों के आसपास नहीं चलेंगी शराब की दुकानें

Wednesday, October 22, 2014

बाल स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया जाएगा बाल दिवस

शिक्षक दिवस और गांधी जयंती को अलग तरीके से मनाने के बाद अब केंद्र सरकार बाल दिवस, 14 नवंबर को भी नए रूप में मनाने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इस बार बाल दिवस को बाल स्वच्छता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। साथ ही 14-19 नवंबर के बीच राज्यों में विशेष बाल अभियान भी चलाया जाएगा। इस संदर्भ में बाल एवं महिला विकास मंत्रालय के सचिव वीएस ओबरॉय ने सभी राज्य सरकारों को चिट्ठी लिखी है। पत्र में कहा गया है कि स्वच्छ भारत के लक्ष्य को पूरा करने में बच्चे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्हें स्वच्छता के लिए प्रेरित किया जा सकता है। वे दूसरों के लिए उदाहरण भी बन सकते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छता मिशन से बच्चों को जोड़ते हुए बाल दिवस को बाल स्वच्छता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा।
महत्वपूर्ण यह है कि राज्यों में चलाए जाने वाले विशेष अभियान पर केंद्र पूरी निगरानी भी रखेगा।
  • 14 से 19 तक रोज अभियान
14 से 19 नवंबर के बीच हर दिन स्वच्छता को लेकर राज्य, जिला व ब्लॉक स्तर पर अलग-अलग अभियान चलाए जाएंगे। इन छह दिनों को बाल स्वच्छता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। 14 नवंबर को बाल स्वच्छता मिशन की शुरुआत आंगनबाड़ी केंद्रों की साफ-सफाई से होगी। इस अभियान में खासतौर पर छह बिंदुओं को शामिल किया गया है। इनमें आंगनबाड़ी सफाई, खेल के मैदान और उसके आसपास की सफाई, बच्चों की साफ-स्वच्छता, खाद्य पदार्थ, पेयजल और शौचालय की सफाई को शामिल किया गया है।

शैक्षिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण के लिए खरीदे जाने वाले सामानों पर टीडीएस में छूट -

लखनऊ (ब्यूरो)। राज्य सरकार ने नगर विकास मंत्री मो. आजम खां के अनुरोध पर शैक्षिक संस्थाओं को टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस) कटौती से छूट दे दी है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक में वाणिज्य कर विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।
उत्तर प्रदेश मूल्य संवर्धित कर अधिनियम (वैट) की धारा 34 में माल की बिक्री पर टैक्स कटौती की व्यवस्था दी गई है। इसके आधार पर शैक्षिक संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण के लिए खरीदे जाने वाले सामानों पर 4 प्रतिशत टीडीएस कटौती की जाती है। आजम खां ने अनुरोध किया था कि इससे शैक्षिक संस्थाओं के लिए खरीदे जाने वाले सामानों की लागत बढ़ जाती है, इसलिए इससे छूट दे दी जाए।

Monday, October 20, 2014

स्‍कूल की सफाई में अव्‍वल रहने पर मिलेगा एक लाख रूपया - सी0बी0एस0ई0 ने चलाया स्‍वच्‍छ भारत स्‍वच्‍छ विद्यालय अभियान -


29 हजार वेतन है, क्या पढ़ाती हैं, बच्चों को गिनती नहीं आती

  • मोहनलालगंज में प्राथमिक स्कूल के औचक निरीक्षण के दौरान खाना खाते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
  • लोहिया ग्राम में औचक निरीक्षण पर पहुंचे सीएम ने शिक्षिका को फटकारा
लखनऊ(ब्यूरो)। तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चे न गिनती सुना पाए, न ही ककहरा। मोहनलालगंज के लोहिया ग्राम भसण्डा के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा का यह स्तर देख मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भड़क उठे। उन्होंने स्कूल की शिक्षिका को फटकारते हुए कहा, 29 हजार वेतन पाने के बाद भी आप लोग बच्चों को ठीक से नहीं पढ़ाते? आखिर गांव के बच्चे पढ़ाई में कैसे तेज होंगे। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य की गुणवत्ता जांचने के लिए नियमित निगरानी का निर्देश दिया। अफसरों को चेताया कि उदासीनता और लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों को चिह्नित कर कार्रवाई के दायरे में लाया जाए।
सोमवार को चिह्नित लोहिया ग्राम भसण्डा में औचक निरीक्षण करने पहुंचने सीएम के सामने प्राथमिक स्कूलों में दी जा रही स्तरहीन पढ़ाई की कलई खुल गई। कक्षा तीन और चार के बच्चे गिनती और हिन्दी वर्णमाला के कखगघ... तक नहीं सुना पाए। स्कूली शिक्षा की जमीनी हकीकत देख मुख्यमंत्री भौचक रह गए। शिक्षिका से सीएम ने कहा इतना वेतन पाने के बाद भी आप लोग अगर अपना काम ठीक तरह से नहीं करेंगे तो गांव के बच्चे कैसे पढ़ाई में तेज होंगे।

प्राइमरी विद्यालयों का सत्र भी 01 अप्रेैल से शुरू होगा - तैयारी शुरू। पाठय पुस्‍तकों का टेण्‍डर दिसम्‍बर माह में -


Thursday, October 16, 2014

स्कूलों में चलेगा पौधरोपण अभियान

लखनऊ (ब्यूरो)। माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली ने राजकीय व सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में पौधरोपण अभियान चलाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा है कि अगस्त 2014 तक मात्र 23 प्रतिशत पौधरोपण स्कूलों में किया गया है। इसलिए अभियान चलाकर लक्ष्य को पूरा किया जाए। वह अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दीपावली से पूर्व छात्र-छात्राओं से पौधरोपण कराया जाए।

चार माह बाद नहीं पहुंचीं किताबें

  • दौरे पर निकले खंड शिक्षा अधिकारी 

  • शासन ने बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण

  • अधिकतर विद्यालयों में अवकाश पर मिले शिक्षक


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संसू अजरुनगंज : परिषदीय विद्यालयों के शैक्षिक सत्र के चार महीने गुजर चुके हैं, लेकिन गुरुजी अभी तक बच्चों को किताबें ही नहीं बांट सके हैं। गुरुवार को दैनिक जागरण में प्रकाशित ‘भविष्य की पीढ़ी खेलते मिली सांप-सीढ़ी’ खबर का संज्ञान को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी दौरे पर निकले तो ऐसी ही तमाम खामियां सामने आईं।1खंड शिक्षा अधिकारी राम नरायन यादव प्राथमिक विद्यालय डिप्टीगंज पहुंचे तो शिक्षकों की घोर लापरवाही सामने आई। हेड सीमा द्विवेदी व एक सहायक अध्यापिका नदारद मिलीं। बीईओ ने बच्चों से किताबों के बाबत जानकारी ली, तो हिंदी की पुस्तक कलरव व गणित की पुस्तक गिनतारा न मिलने की बात सामने आई। कक्षा तीन व चार के छात्रों को बीते साल के पास हुए बच्चों की किताबें देने की बात सामने आई। विद्यालय के शौचालय में ताला लगा था। चारो तरफ गंदगी फैली मिली।प्राथमिक विद्यालय मलाक में मीनू के अनुसार मिड डे मील बनता नहीं मिला। स्कूल में पंजीकृत 42 बच्चो में मात्र 15 ही उपस्थित थे। प्राथमिक विद्यालय हरिहरपुर में 56 बच्चो में 17 बच्चे थे। हेड विनोद गुप्ता बीते दो दिनों से नदारद मिले। 1अलमारी बंद थे रजिस्टर1प्राथमिक विद्यालय डिप्टीगंज में मिड डे मील का रजिस्टर हेड मैडम अलमारी में बंद था और हेड नदारद। यही हाल प्राथमिक विद्यालय हरिहरपुर का भी रहा। हेड विनोद गुप्ता सभी रजिस्टर एक कमरे में बंद कर नदारद रहे। 1छात्र से हिंदी लिखवाते खंड शिक्षा अधिकारीविघालयों में किताबें न पहुंचना गंभीर विषय है। इसकी जानकारी खंड शिक्षा अधिकारी से लेकर जांच की जाएगी। यह एक गंभीर मामला है।

Tuesday, October 14, 2014

सरकारी स्कूलों में कंपनियां बनाएंगी एक लाख शौचालय

  • स्मृति ईरानी के साथ बैठक में किया कंपनियों ने वादा

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नई दिल्ली : सरकारी स्कूलों में शौचालय और उनके रखरखाव की समस्या जल्दी ही हल हो सकती है। सरकारी और निजी कंपनियों ने एक लाख स्कूलों में अपने स्तर पर शौचालय बनाने का वादा किया है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ बैठक में ये कंपनियां आगे आई हैं। इनमें सरकारी कंपनी एनटीपीसी से लेकर टीसीएस, भारती और अंबुजा सीमेंट जैसी निजी कंपनियां भी शामिल हैं। अगले साल तक सभी स्कूलों में सुचारु शौचालय सुनिश्चित करने के अभियान के तहत स्मृति ईरानी ने मंगलवार को विभिन्न कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें अकेले सरकारी कंपनी एनटीपीसी ने ही 24 हजार शौचालय बनाने का वादा किया है। ईरानी ने भरोसा दिलाया है कि कंपनियों को इस काम में सरकारी तंत्र का पूरा सहयोग मिलेगा। आइटी कंपनी इंफोसिस के ट्रस्ट इंफोसिस फाउंडेशन की अध्यक्ष सुधा मूर्ति ने भुवनेश्वर के 109 स्कूलों को शौचालय निर्माण के लिए बुक किया। मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने वेबसाइट पर देशभर के तमाम स्कूलों में शौचालय की स्थिति के बारे में सूचना उपलब्ध करवाने के साथ ही कंपनियों के लिए आनलाइन ही उस स्कूल को चुनने की सुविधा दी गई है। बैठक के दौरान टीसीएस, टोयोटा किलरेस्कर, भारती फाउंडेशन और अंबुजा सीमेंट ने भी बड़ी संख्या में स्कूलों में शौचालय बनाने का वादा किया है। मंत्रलय का दावा है कि इन कंपनियों की मदद से देशभर के एक लाख स्कूलों में शौचालय बना लिए जाएंगे। बाकी स्कूलों में सरकार अपने स्तर पर शौचालय बनवाएगी। गौरतलब है कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले साल भर में देशभर के सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से एक शौचालय बनाने का लक्ष्य रखा था। मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने इसके लिए ‘स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय’ अभियान चलाया है।

अब सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड के स्कूलों का सत्र

  • अप्रैल से शुरू होगा सत्र, पढ़ाई सुबह 8.50 से
लखनऊ। उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद से संचालित होने वाले विद्यालयों का नया सत्र अब सीबीएसई की तर्ज पर अप्रैल से शुरू होगा। राजकीय शिक्षकों को एश्योर्ड कॅरिअर प्रमोशन (एसीपी) का लाभ मिलेगा। स्कूलों के खुलने का समय सुबह 9.50 की जगह 8.50 किया जाएगा। ये अहम घोषणाएं माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली ने मंगलवार को उप्र राजकीय शिक्षक संघ के 63वें प्रांतीय सम्मेलन में कीं। एसीपी से प्रदेश के 10 हजार से अधिक शिक्षकों को लाभ होगा। उन्होंने कहा, किसी भी हाल में परीक्षा में नकल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने एक माह के अंदर ही 10 हजार शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने की बात कही।
इससे पहले मुख्य अतिथि मंत्री महबूब अली ने राजकीय इंटर कॉलेज में प्रांतीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आने वाले सत्र से माध्यमिक शिक्षा परिषद से संचालित सभी विद्यालयों में सीबीएसई की तरह ही अप्रैल से कक्षाएं शुरू होंगी। इससे सत्र नियमित रहेगा और शिक्षा प्रणाली में सुधार आएगा। वर्तमान में परिषद के विद्यालयों में कक्षाएं सुबह 9.50 से शाम 3.50 बजे तक लगती हैं। कक्षाएं देर से समाप्त होने पर सबसे अधिक समस्या दूर-दराज की छात्राओं को होती है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सुरक्षा के लिहाज से। मंत्री ने कहा, अब कक्षाएं सुबह 8.50 बजे शुरू होकर दोपहर 2.50 बजे खत्म होंगी। सभी विद्यालयों में दो पाली की व्यवस्था नहीं की जाएगी। जहां जरूरत है केवल वहीं दो पालियों में पढ़ाई होगी।
मंत्री से विसंगितयों में सुधार की फरियाद
राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने अपनी मांगें मंत्री के सामने रखीं। प्रांतीय महामंत्री छाया शुक्ला ने कहा कि जहां काम लेने की बात आती है तो राजकीय शिक्षकों को राज्य कर्मचारी माना जाता है और लाभ की बात होने पर उन्हें शिक्षक कहा जाता है। इसी वजह से राजकीय शिक्षकों की स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है। उपाध्यक्ष पारस नाथ पांडेय ने संघ की ओर से मांगपत्र सौंपते हुए कहा, असल में ये मांगें नहीं बल्कि कुछ विसंगतियां हैं जिनमें सुधार की जरूरत है। उन्होंने राज्य कर्मचारियों की तरह 10, 16 व 26 वर्ष की सेवा पर एसीपी का लाभ देने, माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक एवं प्रधानाचार्य पदों पर तत्काल डीपीसी कराते हुए रिक्त पदों को भरने, अप्रैल 2005 के बाद के शिक्षकों को पुरानी पेंशन नीति का लाभ देने, राजकीय शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 से बढ़ाकर 62 साल करने जैसी कुल 11 मांगें रखीं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उप्र के अध्यक्ष एसपी तिवारी ने कहा, राजकीय शिक्षकों की स्थिति ऐसी है कि उनको खुद नहीं पता कि वे क्या हैं। उन्हें या तो राज्य कर्मचारी माना जाए या माध्यमिक शिक्षक।
माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने की शिक्षकों को एसीपी देने की घोषणा
शिक्षकों को दिखाया आईना
शिक्षकों को तोहफा देने के साथ ही मंत्री ने उन्हें वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का आईना भी दिखाया। उन्होंने सभी शिक्षकों व प्रधानाचार्यों से पूछा, पिछले पांच साल में प्रदेश भर के राजकीय कॉलेजों से कितने बच्चे आईआईटी में चयनित हुए। कितने बच्चे प्रशासनिक परीक्षाओं में सफल हुए। उनकी इस बात पर सभी लोग चुप रहे। मंत्री ने कहा कि वह शिक्षकों की सभी उचित मांगों को पूरा करेंगे लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वह जानते हैं कि मेरिट कैसे तैयार होती है। उन्होंने परीक्षा में नकल रोकने के लिए सख्त कदम उठाने व शिक्षकों से व्यवस्था में सुधार को कहा।
शिक्षक इंटरनेट से करें खुद को अपडेट संयुक्त शिक्षा निदेशक सुत्ता सिंह ने कहा कि भले ही राजकीयशिक्षकों को प्रशिक्षण न मिल पाता हो, आपके यहां प्राइवेट स्कूलों की तरह स्मार्ट क्लासरूम व अन्य संसाधनों की कमी हो, फिर भी यह आपकी जिम्मेदारी है कि उपलब्ध संसाधनों में ही अपना बेहतर देते हुए शिक्षा में सुधार करें। उन्होंने इसके लिए आईटी फ्रेंडली होकर इंटरनेट का प्रयोग करके खुद को अपडेट करने की बात कही। सम्मेलन में राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज के प्रधानाचार्य बीएन खरे, राजकीय इंटर कॉलेज हुसैनाबाद के प्रधानाचार्य सीबी शुक्ला, कार्यक्रम के संयोजक एमएल दक्ष, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इंदिरानगर की प्रधानाचार्या साधना कुमार उपस्थित रहे।
आईटी की भी होगी पढ़ाई
माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की नवगठित बोर्ड की मंगलवार को हुई बैठक में बोर्ड की गतिविधियों के संचालन के लिए पांच उप समितियों का गठन करने के साथ नौवीं से बारहवीं कक्षा के लिए सूचना प्रौद्योगिकी शिक्षा की पढ़ाई कराने का फैसला किया गया। सूचना प्रौद्योगिकी को अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक विषय के तौर पर रखा जाएगा। पहली बैठक की अध्यक्षता माध्यमिक शिक्षा परिषद के सभापति एवं निदेशक माध्यमिक शिक्षा अवध नरेश शर्मा ने की।

Monday, October 13, 2014

शिक्षकों ने कहा, एबीएसए हटेंगे तभी समाप्त होगा धरना

खंड शिक्षा अधिकारी पर उत्पीड़न का आरोप


मोहनलालगंज : विकास खंड के परिषदीय पूर्व माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारी पर आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उनके कार्यालय पर सोमवार को धरना शुरु किया। शिक्षकों ने धरने में चेतावनी दी कि जब तक जांच कर उक्त अधिकारी को यहां से हटाया नहीं जाता तब तक हम लोग भी नहीं हटेंगे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को मोहनलालगंज में खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा शिक्षक शिक्षिकाओं का मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न करने के विरोध में शुरु हुए धरने में शिक्षकों ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा स्कूल कक्षों के निर्माण में आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न करने के अलावा समय से कार्यालय में नहीं बैठते, शाम को व अवकाश के दिनों में कार्यालय आकर शिक्षिक शिक्षिकाओं को कार्यालय बुला कर परेशान करते हैं। शिक्षक संघ नेताओं ने कहा कि सभी शिक्षकों के अवशेषों का तत्काल भुगतान किया जाय, प्रसूति अवकाश के मामलों को निस्तारित कराया जाय, सभी भत्ताें का भुगतान कराया जाय, सेवा पुस्तिकाओं का अवलोकन किया जाय व समस्याओं को जानने के लिए बीआरसी पर मासिक गोष्ठी की व्यवस्था की जाय, चिकित्सीय अवकाश से वापस आने पर कार्यभार देने के लिए उच्च अधिकारियों से आदेश प्राप्त करने की नई व्यवस्था को समाप्त किये जाने व शिक्षक शिक्षिकाओं पर कार्रवाई के नाम पर अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड को समाप्त करने सहित कई मांगों को शामिल करते हुए शिक्षक संघ ने नायब तहसीलदार शिल्पा आयरन को जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा। धरने में क्षेत्रीय अध्यक्ष कमल किशोर वर्मा, मंत्री राम शंकर शुक्ला सहित सुधांशु मोहन, अवधेश कुमार, योगेंद्र सिंह, राकेश यादव, प्रेम प्रकाश व अन्य कई शिक्षक नेता उपस्थित थे। एबीएसए कार्यालय में कोई मौजूद नहीं रहा।
मुख्यमंत्री की सराहना
अध्यापक को कान पकड़वाने वाले एसडीएम को निलंबित करने की कार्रवाई किये जाने पर शिक्षक-शिक्षिकाओं ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सराहना करते हुए बधाई दी।

अब नहीं चलेंगे एक प्राथमिक विद्यालय में कई-कई आंगनबाड़ी केंद्र

  • ऐसे आंगनबाड़ी केंद्र होंगे दूसरे स्थानों पर होंगे शिफ्ट
  • प्रमुख सचिव ने सभी डीएम को दिये निर्देश
 लखनऊ। प्रदेश में एक-एक प्राथमिक विद्यालयों में अब कई-कई आंगनबाड़ी केंद्र नहीं चल सकेंगे। सरकार ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। ऐसे आंगनबाड़ी केंद्रों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया जायेगा। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के घर पर चल रहे केंद्र भी दूसरे स्थानों पर ले जाये जाएंगे। सरकार ने सभी डीएम को पत्र भेजकर यह काम प्राथमिकता से तुरंत कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपने भवन नहीं हैं। ऐसे में अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र प्राथमिक विद्यलायों में चल रहे हैं। हालात यह है कि कुछ प्राथमिक विद्यालयों में चार-चार, पांच-पांच आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। इस कारण आंगनबाड़ी केंद्र ठीक ढंग से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। कई-कई आंगनबाड़ी केंद्र एक ही स्कूल में चलने के कारण वहां पर जगह की भी कमी हो जाती है। इस कारण बच्चे भी वहां नहीं पहुंचते हैं।
प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग सदाकांत ने ऐसे प्राथमिक विद्यालयों से आंगनबाड़ी केंद्र दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि एक विद्यालय में अधिकतम दो से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र अब संचालित नहीं किये जाएंगे। उन्होंने डीएम से आंगनबाड़ी केंद्र दूसरे सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने के लिए कहा है।
प्रदेश में करीब 100 आंगनबाड़ी केंद्र कार्यकर्त्रियों के घर पर चल रहे हैं। इन केंद्रों को भी दूसरे स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए कहा गया है। प्रमुख सचिव ने कहा कि जहां सरकारी भवन नहीं मिल पा रहे हैं वहां किराये के भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र चलाये जाएं। सरकार शहरी क्षेत्रों में तीन हजार रुपये व ग्रामीण क्षेत्रों में 750 रुपये प्रति माह किराया भी प्रदान करती है।

शिक्षक को उठक-बैठक करवाने वाला आईएएस अफसर सस्पेंड

  • चर्चित आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति के पति अभिषेक सिंह के अमर्यादित आचरण पर कार्रवाई
  • राजनीतिक दबाव में हटाए गए ललितपुर के डीएम
लखनऊ। मथुरा के एक शिक्षक को कान पकड़कर उठक-बैठक कराने वाले आईएएस अफसर अभिषेक सिंह को सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। अभिषेक के अमर्यादित आचरण पर सख्त रवैया अपनाते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को उन्हें निलंबित करने का आदेश दिया। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इसकी पुष्टि की है। अभिषेक चर्चित आईएएस अफसर दुर्गाशक्ति नागपाल के पति हैं।
मामला मथुरा जिले के बलदेव विकास खंड के अंतर्गत पूर्व माध्यमित विद्यालय जुगसना का है। यह स्कूल महावन तहसील में आता है। महावन के एसडीएम अभिषेक ने यहां तैनात सहायक अध्यापक 55 वर्षीय फौरन सिंह से शुक्रवार रात मतदाता पुनरीक्षण कार्य में देरी को लेकर बदसुलूकी की थी। फौरन सिंह इस समय बतौर बीएलओ मतदाता पुनरीक्षण अभियान में लगे हैं।

बेटे के सामने ही कान पकड़वाया फिर जेल भेजने की धमकी दी
आरोप है कि महावन के एसडीएम अभिषेक ने शुक्रवार रात करीब नौ बजे पुलिस भेजकर शिक्षक फौरन सिंह को अपने कैंप कार्यालय बुलवाया। फौरन सिंह अपने बेटे के साथ पहुंचे तो अभिषेक ने काम में देरी पर उन्हें जमकर फटकारा। फिर कान पकड़कर उठक-बैठक करने को कहा। ऐसा न करने पर जेल भिजवाने की धमकी दी। तब फौरन सिंह ने अपने बेटे के सामने ही रोते-रोते उठक-बैठक लगाई।