अंबेडकरनगर। शुकलहिया निवासी मदनलाल शुक्ल बताते हैं कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उन्होंने डायट प्राचार्य रामनगर से अवकाश के दिन जलपान और भोजन का टेंडर निकालने के औचित्य के बारे में सूचना मांगी थी। जब निर्धारित समय में सूचना नहीं मिली, तो उन्होंने राज्य सूचना आयोग से शिकायत की। बाद में प्राचार्य पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसके बाद भी उन्हें सूचना नहीं मिली, तो अब उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
...लेकिन कुछ मामलों में कारगर भी
बीड़ी मजदूरों की कायापलट
फैजाबाद। अतहर शम्सी ने वर्ष 2009 में बीड़ी मजदूरों की पगार से संबधित जानकारी लेबर कमिश्नर कानपुर से मांगी। इस जानकारी ने बीड़ी मजदूरों की जिंदगी को काफी हद तक बदल दिया। मजदूरी 28 रुपये से बढ़कर अब 55 रुपये हो गई। इससे प्रदेश के पांच लाख बीड़ी मजदूरों का लाभ हुआ, जिनमें से 12 हजार मजदूर फैजाबाद के हैं।
आंखें गंवाने वालों में जगाई न्याय की आस
सुल्तानपुर। 18 नवंबर 2005 से दिसंबर 2005 तक कादीपुर सीएचसी पर निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन एवं लेंस प्रत्यारोपण शिविर आयोजित किया गया था। जिला अंधता निवारण समिति की ओर से आयोजित इस शिविर में चिकित्सकों एवं अन्य कर्मियों की लापरवाही से 10 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई थी। आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. राकेश सिंह ने मामले को प्रमुखता से उठाया था। जांच समिति ने चिकित्सकों, आयोजक संस्था को दोषी माना था। फिर भी पीड़ितों को क्षतिपूर्ति नहीं मिली। 2009 में डॉ. राकेश सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिलने पर सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय टीम ने सुल्तानपुर आकर जांच की और अपनी रिपोर्ट सौंपी है।
‘सूचना के सिपाही’ का कत्ल भी हुआ
सुल्तानपुर। जिले में आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर आवेदक को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी थी। धम्मौर थाने के अल्पी मिश्र का पुरवा निवासी प्रमोद मिश्र ने गांव के ही एक शिक्षामित्र के बारे में आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी। इसी मामले को लेकर बाद में प्रमोद मिश्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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