Monday, October 13, 2014

दूसरी काउंसिलिंग के बाद भी 30 हजार सीटें खाली

 लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से सत्र 2014-15 में दाखिले के लिए करायी गई दूसरी काउंसिलिंग के बाद भी बीएड की तकरीबन 30 हजार सीटें खाली रह गई हैं। खाली सीटों की संख्या बढ़ भी सकती है। बेरोजगारी की बड़ी फौज के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में बीएड की सीटें खाली रह जाना इस बात का संकेत है कि रोजी के बाजार में बीएड का भाव गिरा है। बीएड की सीटें खाली रह जाने से सौ कालेजों के सामने बंद होने का संकट खड़ा हो गया है। 1प्रदेश में बीएड की 138230 सीटें हैं। इन सीटों पर दाखिले के लिए झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने बीती 20 मई को संयुक्त प्रवेश परीक्षा करायी थी। 234674 छात्रों ने आवेदन किया था जिनमें से 214103 इम्तिहान में बैठे। चार जून को परीक्षाफल घोषित करने के बाद बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने सात जून से दो जुलाई तक पहली काउंसिलिंग करायी, जिसमें 170000 अभ्यर्थियों को बुलाया गया। 66320 अभ्यर्थियों को कालेज आवंटित कर दिये गए जबकि आधे से ज्यादा यानी 71910 सीटें खाली रह गईं। सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिलने पर पांच से दस अक्टूबर तक दूसरी काउंसिलिंग करायी गई।1बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार अखिलेश चंद्र के मुताबिक दूसरी काउंसिलिंग के बाद भी बीएड की तकरीबन 30 हजार सीटें खाली रह गई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि प्रवेश प्रक्रिया समाप्त होने पर यह संख्या बढ़ भी सकती है। उप्र स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी के मुताबिक बीएड की ओर छात्रों के रुझान में आई इस कमी के चलते मौजूदा सत्र में 100 कालेजों के सामने बंदी का संकट पैदा हो गया है। पहले बीएड करना परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक की नौकरी पाने का आसान तरीका था। जबसे राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए सिर्फ बीटीसी को मान्य कर दिया तब से बीएड का क्रेज काफी कम हो गया है।

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