अब नहीं कर सकेंगे स्थायी नौकरी का दावा
कानपुर: चौबेपुर स्थित एक कंपनी में कार्यरत अशोक कुमार और रूबी सिंह को काम करते हुए काफी वक्त हुआ तो उन्होंने खुद को स्थायी करने के लिए कंपनी अधिकारियों पर दबाव बनाया। निकाले जाने पर उन्होंने लेबर कार्यालय में मुकदमा कर दिया जो आज भी लंबित है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद लेबर कोर्ट में चल रहे सैकड़ों मामलों में अब शायद ही ऐसे कर्मचारी स्थायित्व का दावा कर सकें। सरकारी या गैर सरकारी संस्थाओं में कई महीनों की नौकरी करने के बाद स्थायित्व का दावा करने वाले कर्मचारी अब ऐसा नहीं कर पाएंगे हालांकि वह क्षतिपूर्ति की मांग जरुर कर सकते हैं। एफसीआई में हरिनंदन प्रसाद समेत दो कर्मचारियों ने संविदा पर तीन साल काम किया। इसके बाद इन कर्मचारियों को निकाल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति केएसपी राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति डॉ.एके सीकरी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने विस्तृत आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति एक वर्ष में लगातार 240 दिन कार्य करने मात्र से ही खुद के स्थायित्व का दावा नहीं कर सकता है। पदों को बनाना, समाप्त करना और उन पर स्थायीकरण करना सेवायोजकों का अपना अधिकार है लिहाजा कोर्ट इसमे हस्तक्षेप नहीं करेगी। वरिष्ठ अधिवक्ता कौशल किशोर शर्मा के मुताबिक अदालत के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं है लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि कर्मचारियों के हितों की भी अनदेखी न हो।6एफसीआई कर्मचारियों की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
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